13/05/2026
किसान भाइयों नमस्कार। किसान हेल्पलाइन के इस विशेष और बेहद महत्वपूर्ण post में आपका स्वागत है। खेती-किसानी में फसल को कीटों, बीमारियों और पोषक तत्वों की कमी से बचाने के लिए हम अक्सर कई तरह की दवाइयों, टॉनिक और खादों का एक साथ मिलाकर छिड़काव करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि गलत दवाइयों को एक साथ मिलाने से या उन्हें गलत क्रम में पानी में घोलने से उनका असर पूरी तरह खत्म हो जाता है? कई बार तो ऐसा होता है कि दवाइयां पानी में जाते ही फट जाती हैं या नीचे बैठ जाती हैं। इससे न केवल आपकी महंगी दवाई और मेहनत का पैसा बर्बाद होता है, बल्कि फसल को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। आज हम कृषि विज्ञान के उन मूलभूत सिद्धांतों और कीटनाशक मिक्सिंग के उस सही क्रम पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिन्हें अपनाकर आप अपनी खेती में बेहतरीन परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
सबसे पहले हमें कीटनाशक मिलाने के कुछ बुनियादी और वैज्ञानिक नियमों को समझना होगा। मिक्सिंग का पहला नियम यह है कि दो या दो से अधिक रसायनों को पानी में मिलाने के बाद उनका घोल पूरी तरह से स्थिर (स्टेबल) रहना चाहिए। यदि घोल फट जाता है, उसमें दाने बन जाते हैं या वह बर्तन की तली में बैठ जाता है, तो इसका सीधा अर्थ है कि दवाइयां आपस में प्रतिक्रिया (रिएक्शन) कर चुकी हैं और अब वे फसल पर कोई काम नहीं करेंगी। दूसरा नियम यह है कि मिलाने के बाद सभी रसायनों के सक्रिय तत्व (एक्टिव इनग्रेडिएंट) सक्रिय रहने चाहिए। वे एक-दूसरे के असर को काटने वाले या कमजोर करने वाले नहीं होने चाहिए। तीसरा और बहुत ही महत्वपूर्ण नियम यह है कि कभी भी एक ही लक्ष्य के लिए काम करने वाले दो कीटनाशकों को आपस में न मिलाएं। उदाहरण के लिए, यदि आप इल्ली मारने के लिए क्लोरोपायरीफॉस का उपयोग कर रहे हैं, तो उसके साथ इल्ली मारने वाली ही कोई अन्य दवा जैसे एमामेक्टिन बेंजोएट मिलाने की कोई वैज्ञानिक आवश्यकता नहीं है। यह केवल आपका खर्च बढ़ाता है और कीटों के अंदर दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है।
अब बात करते हैं दवाइयों को पंप या टंकी में डालने के सही वैज्ञानिक क्रम की। बाजार में कृषि दवाइयां मुख्य रूप से ठोस (पाउडर/दानेदार) या तरल (लिक्विड) रूप में आती हैं। उनके पैकेट पर उनके फॉर्मूलेशन का नाम जैसे WP, डब्ल्यूडीजी, ईसी, एसएल या एससी आदि लिखा होता है। दवाइयों का घोल बनाते समय का सबसे बड़ा और सार्वभौमिक नियम यह है कि हमेशा सबसे पहले ठोस या पाउडर फॉर्मूलेशन को पानी में डालना चाहिए, उसके बाद तरल दवाइयों को और सबसे अंत में चिपको (सर्फेक्टेंट या स्टीकर) को मिलाना चाहिए।
यदि आप पाउडर वाली दवाइयों का मिश्रण बना रहे हैं, तो उन्हें मिलाने का सही क्रम इस प्रकार होना चाहिए: सबसे पहले WP (वेटेबल पाउडर) को मिलाना चाहिए। ये वे पाउडर होते हैं जो पानी में पूरी तरह घुलते नहीं हैं, बल्कि पानी उन्हें केवल भिगोता है। कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कार्बेन्डाजिम जैसी फफूंदनाशक दवाइयां इसी श्रेणी में आती हैं। दूसरे नंबर पर डब्ल्यूडीजी (वेटेबल डिस्पर्जेबल ग्रेन्यूल्स) को मिलाना चाहिए। पानी इन दानों को भिगोने के साथ-साथ घोल में अच्छी तरह फैला देता है। तीसरे नंबर पर एसपी (सॉल्यूबल पाउडर) यानी पूरी तरह से पानी में घुलनशील पाउडर को डालना चाहिए जैसे कि एसिटामिप्रिड। और चौथे नंबर पर एसजी (सॉल्यूबल ग्रेन्यूल्स) यानी पानी में घुलने वाले दानों को मिलाना चाहिए। यदि आपको खेती में दो या अधिक पाउडर दवाइयां मिलानी हैं, तो हमेशा इसी क्रम का सख्ती से पालन करें।
तरल (लिक्विड) दवाइयों को मिलाने का वैज्ञानिक क्रम थोड़ा अलग होता है। तरल दवाओं में सबसे पहले सीएस (कैप्सूल सस्पेंशन) फॉर्मूलेशन को पानी में डालना चाहिए, जैसे लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन के कुछ फॉर्मूलेशन। उसके बाद एससी (सस्पेंशन कंसंट्रेट) को मिलाएं, जैसे कि फिप्रोनिल या स्पिनोसैड। तीसरे नंबर पर एसएल (सॉल्यूबल लिक्विड) को डालें और सबसे अंत में ईसी (इमल्सिफायबल कंसंट्रेट) फॉर्मूलेशन को मिलाना चाहिए। ईसी फॉर्मूलेशन वह दवा होती है जिसे पानी में डालने पर पानी तुरंत दूध की तरह सफेद हो जाता है, जैसे प्रोफेनोफोस या क्लोरोपायरीफॉस।
खेती में कई बार ऐसी स्थिति आती है जब आपको पाउडर और तरल दोनों तरह की दवाइयां एक साथ मिलानी पड़ती हैं। ऐसे में हमेशा पहले पाउडर दवाइयों को उनके बताए गए क्रम में पानी में डालें, उन्हें अच्छी तरह घुलने और मिलने दें, और उसके बाद तरल दवाइयों को उनके क्रम में मिलाएं। आजकल किसान भाई रासायनिक दवाइयों के साथ नीम तेल या कोई अन्य जैविक उत्पाद भी मिलाते हैं। यदि आप ऐसा कर रहे हैं, तो हमेशा ध्यान रखें कि पहले रासायनिक तरल दवा (जैसे ईसी फॉर्मूलेशन) को पानी में अच्छी तरह मिलाएं और उसके बाद नीम तेल या जैविक उत्पाद डालें। ऐसा करने से घोल स्थिर रहता है और फटता नहीं है।
दवाइयों को स्प्रे पंप या ड्रम में घोलने का भी एक सटीक तरीका होता है जिसका पालन हर किसान को करना चाहिए। कभी भी खाली टंकी में सबसे पहले दवा न डालें। हमेशा अपनी स्प्रे टंकी या ड्रम को पहले आधा साफ पानी से भर लें। उसके बाद ऊपर बताए गए वैज्ञानिक क्रम के अनुसार अपनी दवाइयां डालें। जब दवाइयां उस आधे पानी में अच्छी तरह मिल जाएं, तब टंकी का बाकी आधा हिस्सा पानी से भरें। ऐसा करने से दवा पूरे पानी में एक समान रूप से मिल जाती है और स्प्रे करते समय नोजल चोक होने की समस्या नहीं आती है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली वाले खेतों में ड्रिप लाइनों को साफ करने के लिए किसान भाई अक्सर फास्फोरिक एसिड का उपयोग करते हैं। इसे इस्तेमाल करते समय बहुत ही अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। एसिड का उपयोग करते समय सबसे पहले अपने ड्रम का तीन-चौथाई (75 प्रतिशत) हिस्सा पानी से भर लें। उदाहरण के लिए, यदि 200 लीटर का ड्रम है, तो उसमें 150 लीटर पानी भर लें। उसके बाद बहुत धीरे-धीरे फास्फोरिक एसिड (अधिकतम 5 लीटर) को पानी में डालें और डंडे से घोलते रहें। यह प्रक्रिया करते समय रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण घोल गर्म हो सकता है। जब एसिड पानी में अच्छी तरह मिल जाए और थोड़ा ठंडा हो जाए, तब ड्रम को बाकी पानी से पूरा भरें और ड्रिप में चलाएं। रसायन विज्ञान का सबसे बड़ा सुरक्षा नियम हमेशा याद रखें: कभी भी एसिड के अंदर सीधा पानी नहीं डालना चाहिए, ऐसा करने से तेज धमाका हो सकता है या ड्रम फट सकता है। हमेशा पानी के अंदर धीरे-धीरे एसिड डालना चाहिए।
अब हम कुछ विशेष फफूंदनाशकों और उर्वरकों के मिश्रण से जुड़ी कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण सावधानियों पर चर्चा करेंगे, जिन्हें लेकर किसानों के मन में सबसे ज्यादा संशय रहता है। कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और सल्फर दो ऐसे रसायन हैं जिनका खेती में बहुत व्यापक उपयोग होता है। कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का पीएच स्तर बहुत अधिक होता है, इसलिए इसे कभी भी अम्लीय (एसिडिक) खादों जैसे 0:52:34, 19:19:19 या कैल्शियम नाइट्रेट के साथ नहीं मिलाना चाहिए। यदि आप कॉपर और कैल्शियम नाइट्रेट को एक साथ मिलाते हैं, तो वे तुरंत रासायनिक प्रतिक्रिया करेंगे, कैल्शियम अलग हो जाएगा और पूरा घोल फटकर दानेदार हो जाएगा, जिससे आपकी फसल को कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह, सल्फर अपने आप में बहुत अधिक प्रतिक्रियाशील (रिएक्टिव) तत्व है। इसलिए कृषि विशेषज्ञों द्वारा यही सलाह दी जाती है कि सल्फर का छिड़काव हमेशा अकेले ही करें। इसके साथ आप आवश्यकता पड़ने पर ज्यादा से ज्यादा चिपको (स्टीकर) मिला सकते हैं, लेकिन अन्य किसी भी प्रकार की दवाइयां या पानी में घुलनशील खाद मिलाने से पूरी तरह बचें।
अक्सर किसान भाइयों की यह शिकायत रहती है कि बाजार से लाया हुआ बोरॉन पानी में पूरी तरह से घुलता नहीं है। इसका मुख्य कारण आपके ट्यूबवेल के पानी का अधिक क्षारीय (हाई पीएच) होना है। बोरॉन खुद भी एक हाई पीएच वाला तत्व है, इसलिए यह क्षारीय पानी में आसानी से नहीं घुलता। इस आम समस्या से बचने के लिए, बोरॉन का शुरुआती घोल बनाने के लिए हमेशा साफ और कम टीडीएस वाले पीने योग्य पानी का उपयोग करें। जब यह साफ पानी में अच्छे से घुल जाए, तब उसे अपनी स्प्रे की मुख्य बड़ी टंकी में डाल दें।
इसके अलावा, कुछ किसान भाई डीएपी और यूरिया के घोल के साथ जैविक उर्वरकों (जैव उर्वरक या बायो-बैक्टीरिया) को मिलाकर फसल की पत्तियों पर छिड़काव करने का प्रयास करते हैं। यह एक बहुत बड़ी तकनीकी गलती है। डीएपी और यूरिया रासायनिक लवण (केमिकल सॉल्ट) हैं। जब आप इन्हें पानी में घोलकर इनके साथ जैविक सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया) मिलाते हैं, तो रासायनिक लवणों के तेज प्रभाव और खारेपन के कारण वे लाभदायक जैविक बैक्टीरिया टंकी के अंदर ही तुरंत मर जाते हैं। इसके अलावा, आपको यह भी समझना होगा कि जैविक उर्वरकों के बैक्टीरिया हमेशा जमीन के अंदर, जड़ों के पास काम करते हैं, पत्तियों के ऊपर खुली धूप में उनका कोई विशेष लाभ नहीं होता। इसलिए जैविक उर्वरकों का प्रयोग हमेशा कार्बनिक खाद के साथ मिट्टी में ही करना चाहिए, रासायनिक खादों के स्प्रे के साथ बिल्कुल नहीं।
जब आप फसल की बुवाई के समय बेसल डोज के रूप में जमीन में कई तरह की रासायनिक खादें जैसे 10:26:26, एसएसपी, कैल्शियम, मैग्नीशियम और माइक्रोन्यूट्रिएंट एक साथ मिलाकर डाल रहे हों, तो रसायनों को आपस में बंधने (लॉक-अप होने) से रोकने का एक बहुत ही कारगर तरीका है। उस पूरे रासायनिक मिश्रण में अरंडी की खली या नीम की खली जैसी जैविक (ऑर्गेनिक) खाद की कुछ बोरियां जरूर मिला लें। जैविक खाद में मौजूद कार्बन रसायनों के बीच बफर का काम करता है, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का चिलेशन करता है और उन्हें जमीन में फिक्स होने से बचाकर पौधों की जड़ों के लिए आसानी से उपलब्ध कराता है।
किसान भाइयों, कीटनाशकों और खादों का यह सही मिश्रण और तकनीकी ज्ञान न केवल आपकी फसल को बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि आपके समय, मेहनत और खून-पसीने की कमाई की भी भारी बचत करता है। एक अच्छी आदत यह भी बनाएं कि किसी भी नई दवा या खाद का बड़ा मिश्रण बनाने से पहले एक छोटी बाल्टी या कांच के गिलास में थोड़ा सा घोल बनाकर जरूर जांच लें कि कहीं घोल फट तो नहीं रहा है। खेती में विज्ञान और सही जानकारी ही आपकी समृद्धि की असली कुंजी है।